[ JSSC CGL 2024 – Paper 1 ]
दिए गए अनुच्छेद को ध्यानपूर्वक पढ़ें और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्नों के सही उत्तर का चयन करें।
[ JSSC CGL 2024 – Paper 1 ]
Read the given passage carefully and select the correct answers to the questions based on the passage.
अनुच्छेद
निर्देश प्र.सं (21-25): निम्न्न अनुच्छेद को पढ़कर दिए गए प्रश्न के उत्तर विकल्पों में से चुनकर दीजिए।
यह एक सर्वविदित तथ्य है कि मानवीय गुणों का अधिकाधिक विकास विपरीत परिस्थितियों में होता है। जीवन में सर्वत्र इस सत्य के उदाहरण भरे पड़े हैं। कष्ट और पीड़ा आन्तरिक वृत्तियों के परिशोधन के साथ ही एक ऐसी आन्तरिक दृढ़ता को जन्म देते हैं जो मनुष्य को तप्त स्वर्ण की भाँति खरा बनाता है। विपत्तियों के पहाड़ से टकराकर उसका बल बढ़ता है। हृदय में ऐसी अदभुत वृत्ति का जन्म होता है कि एक बार कष्टों से जूझकर फ़िर वह उनको खेल समझने लगता है। उसके हृदय में विपत्तियों को ठोकर मारकर अपना मार्ग बना लेने की वीरता उत्पन्न हो जाती है। मन की भाँति ही शरीर की दृढ़ता शारीरिक श्रम के द्वारा आती है। शारीरिक परिश्रम उसके शरीर को बलिष्ठ बनाता है। विपत्तियों में तपकर दृढ़ हुए शरीर की भाँति परिश्रम की अग्नि में तपकर शरीर लौह इस्पात का बन जाता है। चारित्रिक दृढ़ता के लिए जो कार्य कष्टों का आधिक्य करता है, शारीरिक दृढ़ता के लिए वही कार्य करता है। दोनों ही ऐसे हथौड़े हैं जो पीट-पीट कर शरीर और मन में इस्पाती दृढ़ता को जन्म देते हैं।
यह एक सर्वविदित तथ्य है कि मानवीय गुणों का अधिकाधिक विकास विपरीत परिस्थितियों में होता है। जीवन में सर्वत्र इस सत्य के उदाहरण भरे पड़े हैं। कष्ट और पीड़ा आन्तरिक वृत्तियों के परिशोधन के साथ ही एक ऐसी आन्तरिक दृढ़ता को जन्म देते हैं जो मनुष्य को तप्त स्वर्ण की भाँति खरा बनाता है। विपत्तियों के पहाड़ से टकराकर उसका बल बढ़ता है। हृदय में ऐसी अदभुत वृत्ति का जन्म होता है कि एक बार कष्टों से जूझकर फ़िर वह उनको खेल समझने लगता है। उसके हृदय में विपत्तियों को ठोकर मारकर अपना मार्ग बना लेने की वीरता उत्पन्न हो जाती है। मन की भाँति ही शरीर की दृढ़ता शारीरिक श्रम के द्वारा आती है। शारीरिक परिश्रम उसके शरीर को बलिष्ठ बनाता है। विपत्तियों में तपकर दृढ़ हुए शरीर की भाँति परिश्रम की अग्नि में तपकर शरीर लौह इस्पात का बन जाता है। चारित्रिक दृढ़ता के लिए जो कार्य कष्टों का आधिक्य करता है, शारीरिक दृढ़ता के लिए वही कार्य करता है। दोनों ही ऐसे हथौड़े हैं जो पीट-पीट कर शरीर और मन में इस्पाती दृढ़ता को जन्म देते हैं।
Passage
अनुच्छेद आधारित प्रश्न
Passage Based Questions
21.
मनुष्य के शरीर को क्या बलिष्ठ बनाता है?
[A]
शारीरिक परिश्रम
[B]
शारीरिक दृढ़ता
[C]
चारित्रिक दृढ़ता
[D]
अग्नि में तपना
21.
What makes the human body strong?
[A]
Physical labor
[B]
Physical firmness
[C]
Character strength
[D]
Being tempered in fire
सही उत्तर:
शारीरिक परिश्रम
व्याख्या:
अनुच्छेद में स्पष्ट कहा गया है कि शारीरिक परिश्रम मनुष्य के शरीर को बलिष्ठ बनाता है।
Correct Answer:
Physical labor
Explanation:
The passage clearly states that physical labor makes the human body strong.
22.
मनुष्य को सोने जैसा शुद्ध बनाने में कौन सहायक है?
[A]
शरीर की दृढ़ता
[B]
मन की दृढ़ता
[C]
आन्तरिक वृत्ति
[D]
कष्ट और पीड़ा
22.
What helps make a human being pure like gold?
[A]
Physical firmness
[B]
Mental firmness
[C]
Inner tendencies
[D]
Suffering and pain
सही उत्तर:
कष्ट और पीड़ा
व्याख्या:
कष्ट और पीड़ा आंतरिक वृत्तियों के परिशोधन के साथ मनुष्य को तप्त स्वर्ण की भाँति खरा बनाते हैं।
Correct Answer:
Suffering and pain
Explanation:
Suffering and pain purify inner tendencies and make a person genuine like refined gold.
23.
विपरीत परिस्थितियाँ किसका कारण बनती हैं?
[A]
समस्या समाधान का
[B]
चुनौतियाँ स्वीकारने का
[C]
मानवीय गुणों के विकास का
[D]
मानव की उन्नति का
23.
What do adverse circumstances lead to?
[A]
Problem solving
[B]
Accepting challenges
[C]
Development of human qualities
[D]
Human progress
सही उत्तर:
मानवीय गुणों के विकास का
व्याख्या:
अनुच्छेद के प्रथम वाक्य में कहा गया है कि मानवीय गुणों का अधिकाधिक विकास विपरीत परिस्थितियों में होता है।
Correct Answer:
Development of human qualities
Explanation:
The passage states that human qualities develop to a greater extent under adverse circumstances.
24.
विपत्तियों के बीच अपना मार्ग बना लेने की क्षमता कब उत्पन्न होती है?
[A]
बाधाओं से बचकर
[B]
बाधाओं से जूझकर
[C]
साधन-संपन्न बनकर
[D]
कष्टों से बचकर
24.
When does the ability to make one's own path through adversities develop?
[A]
By avoiding obstacles
[B]
By struggling against obstacles
[C]
By becoming resourceful
[D]
By avoiding suffering
सही उत्तर:
बाधाओं से जूझकर
व्याख्या:
विपत्तियों से संघर्ष करने के बाद मनुष्य में उन्हें ठोकर मारकर अपना मार्ग बनाने की वीरता और क्षमता उत्पन्न होती है।
Correct Answer:
By struggling against obstacles
Explanation:
After struggling against adversities, a person develops the courage and ability to overcome them and make his own path.
25.
लोहा इस्पात बनता है। इसका अर्थ क्या है?
[A]
सबल अतिसबल बन जाता है।
[B]
दुर्बल सबल बन जाता है।
[C]
बलहीन बलवान बन जाता है।
[D]
निर्बल प्रबल बन जाता है।
25.
What does "iron becomes steel" mean?
[A]
The strong becomes stronger.
[B]
The weak becomes strong.
[C]
The powerless becomes powerful.
[D]
The feeble becomes powerful.
सही उत्तर:
सबल अतिसबल बन जाता है।
व्याख्या:
लोहा इस्पात बनने का आशय है कि जो पहले से मजबूत है, वह और अधिक मजबूत बन जाता है। अनुच्छेद में परिश्रम से शरीर के अत्यधिक दृढ़ होने की बात कही गई है।
Correct Answer:
The strong becomes stronger.
Explanation:
The expression means that something already strong becomes even stronger through hardship and effort.