[ क्षितिज-गद्य खंड प्रश्नों का संग्रह। ]
झारखंड में आयोजित होने वाली JPSC, JSSC, JET, झारखंड पुलिस भर्ती परीक्षा आदि के लिए उपयोगी सामान्य अध्ययन।
[ क्षितिज-गद्य खंड प्रश्नों का संग्रह। ]
Useful GK for JPSC, JSSC, JET, Jharkhand Police and other exams.
281. पत्थर पर किसके फुट प्रिंट थे?
281.
सही उत्तर: गुरुनानक के
व्याख्या: यात्रा-वृत्तांत "साना-साना हाथ जोड़ि ......" में बताया गया है कि पत्थर पर गुरुनानक के फुट प्रिंट थे।
Correct Answer:
Explanation: Important question.
282. जितेन ने किस स्थान को देवी-देवताओं का निवास बताते हुए कहा कि, यहाँ जो गंदगी फैलायेगा मर जायेगा?
282.
सही उत्तर: खेदुम
व्याख्या: यात्रा-वृत्तांत "साना-साना हाथ जोड़ि ......" में जितेन ने खेदुम स्थान को देवी-देवताओं का निवास बताया था और वहाँ की पवित्रता बनाए रखने की बात कही थी।
Correct Answer:
Explanation: Important question.
283. ऐही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा! पाठ के लेखक कौन हैं?
283.
सही उत्तर: शिवप्रसाद मिश्र रूद्र
व्याख्या: ऐही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा! पाठ के लेखक शिवप्रसाद मिश्र रूद्र हैं। यह पाठ हिंदी गद्य खंड के अंतर्गत आता है।
Correct Answer:
Explanation: Important question.
284. ऐही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा! शिवप्रसाद मिश्र 'रूद्र' की किस कृति की एक झाँकी है?
284.
सही उत्तर: बहती गंगा
व्याख्या: ऐही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा! पाठ शिवप्रसाद मिश्र 'रूद्र' की प्रसिद्ध कृति 'बहती गंगा' की एक झाँकी है। इस कृति में काशी और गंगा तट के सामाजिक एवं सांस्कृतिक जीवन का चित्रण किया गया है।
Correct Answer:
Explanation: Important question.
285. बहती गंगा जिसका प्रकाशन 1952 ई. में हुआ था, किनकी कृति है?
285.
सही उत्तर: शिवप्रसाद मिश्र 'रूद्र'
व्याख्या: बहती गंगा का प्रकाशन 1952 ई. में हुआ था। यह शिवप्रसाद मिश्र 'रूद्र' की प्रसिद्ध कृति है, जिसमें काशी और गंगा तट के सामाजिक एवं सांस्कृतिक जीवन का चित्रण किया गया है।
Correct Answer:
Explanation: Important question.
286. बहती गंगा में काशी के दो सौ वर्षों (1750-1950) के अविच्छिन्न जीवन प्रवाह की अनेक क्या हैं?
286.
सही उत्तर: झाँकियाँ
व्याख्या: शिवप्रसाद मिश्र 'रूद्र' की कृति 'बहती गंगा' में काशी के दो सौ वर्षों (1750-1950) के अविच्छिन्न जीवन प्रवाह की अनेक झाँकियाँ प्रस्तुत की गई हैं।
Correct Answer:
Explanation: Important question.
287. ऐही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा का अर्थ क्या है?
287.
सही उत्तर: हे राम इसी स्थान पर मेरी झुलनी खो गई है।
व्याख्या: 'ऐही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा' का अर्थ है कि हे राम, इसी स्थान पर मेरी झुलनी खो गई है। यह लोकभाषा में व्यक्त एक मार्मिक भाव है।
Correct Answer:
Explanation: Important question.
288. झुलनी क्या है?
288.
सही उत्तर: नाक के दोनों छिद्रों के बीच पहना जाने वाला गहना
व्याख्या: झुलनी नाक के दोनों छिद्रों के बीच पहना जाने वाला एक प्रकार का आभूषण है। 'ऐही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा' पाठ में झुलनी का उल्लेख एक लोक आभूषण के रूप में किया गया है।
Correct Answer:
Explanation: Important question.
289. ऐही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा! कहानी किसे रूबरू कराने के लिए संकलित किया गया है?
289.
सही उत्तर: विद्यार्थी
व्याख्या: ऐही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा! पाठ को विद्यार्थियों को काशी के सामाजिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक जीवन से रूबरू कराने के लिए संकलित किया गया है।
Correct Answer:
Explanation: Important question.
290. ऐही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा! में किसकी अभिव्यक्ति है?
290.
सही उत्तर: उपर्युक्त सभी
व्याख्या: ऐही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा! पाठ में यथार्थ और आदर्श, दंत कथा और इतिहास तथा मानव मन की कमजोरियों और उदारताओं की अभिव्यक्ति मिलती है।
Correct Answer:
Explanation: Important question.